रामपाल के झूठे ग्यान पर एक नजर
सतगुरू पुरुष कबीर हैं चारों युग परवान।
झुठे गुरुवा मर गए हो गए भूत मसान ।।
सतगुरु केवल कबीर साहिब ही हुए है या वह संत हुऐ हैं जिनको उन्होने दर्शन दिए इसका सबूत वह सभी संत आपनी अमृत वाणियों मे दे रहे हैं।
अनन्त कोटि ब्रह्माण्ड का एक रति नहीं भार ।
समीक्षा > पहली लाईन मे कह रहा है कि कबीर सतपुरूष है यानि सचा आदमी |आगे कहता है बाकी जितने भी गुरु हुऐ हैं सब झूठे थे और मर कर भूत के समान हो गऐ हैं ये सायद ये नही जानते कि कबीर जी की भी मृत्यु हुई मगहर के पास बहने वाली नदी मे जिसके बारे में कबीर ग्रन्थावली मे लिखा हुआ है राग गौड़ी मे
कबीरा संत नदी गया बहि रे,
ठाढ़ी माइ कराड़े टेरै, है कोई ल्यावैगहि रे॥टेक॥
बादल बाँनी राम घन उनयाँ, बरिषै अमृत धारा॥
सखी नीर गंग भरि आई, पीवै प्राँन हमारा ||
उपरोक्त लाईने दूर नदी पर खड़े एक माली ने कही जिसने वहां नदी के किनारे पलेज लगा रखी थी जिससे साबित होता है कि संत कबीर जी नदी मे बह गए | एक तरफ ये कबीर जी को सतपुरूष सतगुरु कह रहे हैं और दूसरी तरफ भगवान कहते हैं
सतगुरु पुरुष कबीर है कुल के सृजनहार ।।"whole world creater"
गरीब जम जोरा जासे डरे धर्मराय धरे धीर।
समीक्षा > ये देखो कोरा झूठ कह रहे हैं कि सतगुरु कबीर सतपुरूष यानि कि सचा आदमी है और दूसरी तरफ कह रहे हैं कि वो सृष्टि को बनाने वाले हैं क्या सृष्टि एक पुरुष ने बनाई | फिर तो कबीर वो प्रमात्मा था जिसने मन, जीव, सूरज, धरती बनाई | यहां ये भी बताना जरूरी है कि कबीर जी राम भगत थे क्योंकि रमानंद जी राजा राम के भगत थे | परन्तु कबीर जी उस राम नाम मे उसअविनाशी राम की भगति करते थे जो अलख सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक प्रभु है
अब स्वाल ये उठता है अगर कबीर भगत ने सृष्टि बनाई तो वो राम कौन था जिसकी भगति कबीर ने राम नाम से की | और प्रमात्मा को निरंकार कहा जिसका परमाण कबीर ग्रन्थावली मे है
"गोब्यंदे तूँ निरंजन तूँ निरंजन राया।
तेरे रूप नहीं रेख नाँहीं, मुद्रा नहीं माया॥टेक॥
समद नाँहीं सिषर नाँहीं, धरती नाँहीं गगनाँ।
रबि ससि दोउ एकै नाँहीं, बहता नाँहीं पवनाँ॥
नाद नाँही ब्यँद नाँहीं काल नहीं काया।
जब तै जल ब्यंब न होते, तब तूँहीं राम राया॥
जप नाहीं तप नाहीं जोग ध्यान नहीं पूजा।
सिव नाँहीं सकती नाँहीं देव नहीं दूजा॥
रुग न जुग न स्याँम अथरबन, बेदन नहीं ब्याकरनाँ।
तेरी गति तूँहि जाँनै, कबीरा तो मरनाँ॥219॥
ऐसा सतगुरु एक है अदली अदल कबीर।।-संत गरीब दास जी ।
जिन मोको निज नाम दिया सोई सतगुरु हमार।दादू दुसरा कोई नहीं कबीर सृजनहार ।।
-संत दादू साहेब जी।
समीक्षा > उपर पडो... एक तरफ ये सभी दादू और गरीबदास कबीर को सतगुरु कह रहे हैं | और फिर एकदम ही शृजनहार कह देते हैं | इसलिए ही लोग इन्हे गपौड़ी कहते हैं
धनि कबीर धनि वो संत गुरु जिन परम तत लखाया ।
कहै रैदास सुणौ हौ स्वामी पणै तुमारी आया ।।
-संत रविदास।
समीक्षा > यहां देखो महां गपोड़ कि संत रविदास जी कबीर जी को संत गुरु कहता दिखा रहे हैं जबकि रविदास जी और कबीर जी दोनो ही संत थे और रामानंद के शिष्य थे बताओ कबीर जी रविदास के गुरु कैसे हुऐ , है ना, गपैड़
चार दाग से सतगुरु न्यारा अजरो अमर शरीर ।
दास मलूक सलूक कहत है खोजो खसम कबीर ।।
-संत मलूक दास जी।
समीक्षा > उपरोक्त पंक्ति देखिए मलूक दास कह रहे हैं कबीर का शरीर भीअमर था अगर ऐसा था तो कबीर को उसी शरीर मे मजूद होना चाहिए था कहां गया | ये लोग नही जानते कि कबीर जी नदी मे डूब गये थे,,,, जिसका हमने उपर परमान दे दिया है | है ना गपौड
राधास्वामी पंथ काल का चलाया हुआ पंथ है।यदि कबीर साहेब का सूक्ष्म वेद(स्वसम वेद) पढ़ोगे तो उसमें सृष्टि रचना ,पूर्ण परमात्मा तथा अन्य भविष्यवाणियां कर रखी है जिन्हें सिर्फ उनका कृपा पात्र ही समझ सकता है
समीक्षा > देखो ये क्या कह रहा है इसके कहने का मतलब है बाकी जितने भी पंथ है वो काल के चलाऐ हुऐ हैं पर क्या ये बता सकते हैं कबीर पंथ किसका चलाया हुआ है क्या कबीर पंथ मे लोग मरते नही | ये ही है कबीर पंथ जिसमे दुनिया भर का झूठ है लगता है ये तो ये भी नही जानते कि संसमवेद कबीर का नही नानक जी का लिखा हुआ है कबीर भगत का नही
नीचे देखें जो मनगडन्त किताब से है जो 1995 या 2006 मे कबीर समर्थक दूारा लिखी किताबों मे से हैं जिनमे अंधा झूठ लिखा है
।।धर्मराय(काल ब्रह्म)वचन।।
हे साहेब तुम पंथ चलाओ,जीव उबार लोक ले जाओ।
पंथ एक तुम आप चलाओ, जीवन लै सतलोक पठाओ।।
कहा तुम्हारा जीव नहीं माने,हमारी ओर होय बाद बखाने ।।
काल कहता है कि मेरा पक्ष लेकर तुम्हारे साथ बाद विवाद किया करेंगे।
समीक्षा > उपरोक्त पंक्ति मे काल कह रहा है कि कबीर जी तुम एक पंथ चलाओ और जीवन लेकर सतलोक पहूच जाओ | क्योंकि जीव तुमहरा कहा मानेगगे और आगे काल कबीर को यह भी कह रहा है कि मेरा नाम लेकर लोग तुम से विवाद करेंगे..... हमारे ख्याल से लोग इनसे विवाद नही करते ये खुद ही कबीर पंथी विवाद की जड़ हैं क्योंकि ये हमेशा दूसरे पंथो और धर्मो के पीर पैगम्बर को गलत लिखते हैं और सब को कबीर के अधीन दिखाते हैं
कबीर हेब जी ने आगे कहा है।
सम्वत् सत्रा सौ पचहतर होई,ता दिन प्रेम प्रकटे जग सोई।।
यानि मेरी वाणी सम्वत् १५७५ में पुन: प्रकट होगी।
संत गरीब दास को १०वर्ष की उम्र में ही परमात्मा कबीर साहेब जी ने साधु रुप मे दर्शन देकर अपने साथ लेकर सतलोक ले गए। सतलोक तक सभी लोको की व्यवस्था (स्थिती)दिखा कर पुन: वापिस छोड़ा । परिवार वालों ने मरा हुआ समझ कर दाह संस्कार की तैयारी कर ली ।लेकिन चिता को अग्नि देने से पहले ही उठ खड़े हो गए।
जैसे उठे उन्होने कबीर वाणी बोलना शुरु कर दिया।
"अलल पंख अनुराग है,सुन्न मण्डल रहै थीर।
दास गरीब उदारिया,सतगुरु मिले कबीर।।"
कबीर परमात्मा ने अपनी अमृत वाणियां गरीब दास जी के माध्यम से प्रकट करवा के उन्हें लिपीवद्ध किया गया।जोकि इस समय संत रामपाल जी महाराज के पास ग्र्ंथ रुप में आश्रम में मौजूद है।
समीक्षा > ये उपरोक्त रामपाल की मनगडन्त किताब मे दूसरे ग्रन्थों से पंक्तियां लिखकर और अपने हिसाब से भावर्थ करके लोगों को गुम राह किया है ज्यादातर पंक्तियां गुरूग्रन्थ साहिब जी से चुराई और अपनी किताबें लिखी.... और उन पंक्तियों का मन चाहा अर्थ निकालकर लिखा......हम आपको बताना चाहे गे कि गुरूग्रन्थ साहिब मे जितनी भी वानी है सारी ही निरंकार परमेश्वर के प्रति है किसी भगत या गुरु के प्रति नही है.....
परम् पूज्य संत रामपाल जी महाराज संत गरीब दास जी की सतगुरु प्रणाली से आते हैं।
मार्च १९९७ में फाल्गुन शुक्ल एकम संवत् २०५४को दिन के दस बजे परमेशवर कबीर साहेब जी वास्तविक रुप में संत रामपाल जी महाराज को मिले तथा कहा कि चिंता मत कर, मैं तेरे साथ हुँ।अब सारनाम तथा सार शब्द प्रदान करने का समय आ गया है।
इसलिए अन्य नकली काल के पंथों से मोक्ष नहीं हो सकता।
समीक्षा > देखो महां गपोड़ और झूठ की रामपाल को कबीर जी मिले और रामपाल को बोला चिंता मत कर जितना मर्जी झूठ बोल और लिख मैं तेरे साथ हूं जिसका परिणाम ये हुआ रामपाल ने अपनी किताबों मे अंधा झूठ लिखकर अपने भगतां मे बांटी और उनका इतना माउंड वाछ किया कि अब उनको सच झूठ और झूठ सच लगता है | और कहता है कि दूसरे किसी भी पंथ के गुरु से नाम लेने से मोक्ष नही होगा मेरे से नामलें क्यो कि बाकी सब काल के पंथ हैं
राधास्वामी के मुखिया (परवर्तक)शिवदयालसिंह की मुक्ति नहीं हुई तो अन्य शिष्यों का क्या हाल होगा मृत्यु उपरान्त वे अपनी शिष्य बुक्की मे प्रेत की तरह प्रवेश कर गए थे।उसके बाद बुक्की हुक्का पीने लगी चुरमा लेने तथा पलंग बिछाने लगी उसकी आंखे सुर्ख अंगारा सी हो जाती थी।यदि कोई बात पूछनी होती तो बुक्की के जरिए शिवदयालसिंह से पूछ लिया करते थे ।अधिक जानकारी के लिए पढ़े।जीवन चरित्र स्वामीजी महाराज-लेखक प्रताप सिंह।
स्वामीजी महाराज अंतिम समय तक बुक्की के शरीर में प्रकट रहे।
बुक्की स्वामीजी के पैर का अंगुठा मुंह में रख कर चूसा करती थी।जब कोई मत्था टेकने के वास्ते हटाना चाहता तो वे चरण नहीं छोड़ना चाहती थी।तब मत्था टेकने वाले से कह दिया जाता इस प्यासी को मत हटाओ तुम दुसरे चरण पर मथा टेक लो।और बयान किया करती थी कि मुझे इसमें ऐसा रस आता है कि जैसे कोई दूध पीता है।
श्री शिवदयालसिंह का कोई गुरु नहीं था।उन्होने 17वर्ष तक कोठरीे में बंद रह कर हठयोग किया।वह हुक्का भी पीते थे।
समीक्षा > उपर देखो गपौड कबीर पंथी की राधास्वामी शिवदयाल सिंह की मुक्ति नही हुई ये गपौड़ी ऐसे कह रहे जैसे ये शिवदयाल जी को मिलकर आऐ हो और प्रमात्मा से डिरेक्ट मेल जोल हो.... ये उनके खाने पीने की बात करते हैं.... आदमी क्या पीता खाता है ये अहमियत नही रखता..... अहमिंयत रखती है सचाई इमानदारी.... और किसी की निंदा न करना...... ये कबीर पंथी कितने निंदक हैं आप इनके इस लेखन मे ही देख लो
अगर हम इनके हिसाब से बात मुक्ति की करें तो ... लगता है कबीर की खुद मुक्ति नही हुई क्योंकि कबीर पंथीयों के हिसाब से मुक्त वो होता है जो दूबारा संसार में न आऐ.... पर कबीर जी तो सतयुग, दूापर, त्रेता में भी आऐ और कलयुग मे तो दो बार एकबार तब जब कोई जन्म देकर तलाब के किनारे रख गई और दूसरी बार रामपालीयों के अनुसार रामपाल के रूप मे...... इसका मतलब हुआ कबीर राम भगत का राम नाम से मोक्ष नही हुआ | अब नानक जी ने जो कबीर को काशी मे सतनाम दिया अब वो ही सतनाम का जाप कर, बुरे कर्मो की सजा भुगत कर मोक्ष को प्राप्त होगा
अगर सचाई से जाप न किया फिर आऐगा
जो नानक ने कब्बीर को सतनाम उपदेश दिया उसका मतलब था १ॐ का जाप नानक जी के अनुसार जो ੴ सतनाम या ॐ सतनाम का जाप या वाहगुरू या अल्लाह का जाप नही करता मुक्त नही ......अगर कबीर जी ने शुरू से ही ॐ का जाप किया होता तो पुन: रामपाल के रूप मे जाटनी की कोख से पैदा न होता......... परन्तु कबीर रामपाल के रूप मे आया है ये कबीर पंथी ही कहते हैं जैसे कबीर इन्हे बता कर आया हो.
(ये कबीर पंथी लगता है दिमाग से सरके हुऐ हैं एक तरफ कहते हैं नाम जपने से मोक्ष हो जाता है जैसे कबीर का हो गया और दूसरी तरफ कबीर को पैदा ही करते जा रहे हैं कुछ सोचते ही नही)
जिसके बारे में कबीर साहेब जी कहते हैं।
"गुरु बिन माला फेरते ,गुरु बिन देते दान।
ये दोनों निष्फल है,चाहे पुछो वेद पुरान।।"
समीक्षा > एक तरफ ये रामपल के कबीर पंथी कहते हैं कि किसी को दान नही देना चाहिए | दूसरी तरफ कहते हैं गुरु से पूछ कर ही दान देना चाहिए ..... इसका मतलब हुआ गुरु कहेगा कि दान हमे दो तो उसे ही देना होगा | और कहते हैं गुरु के कहे बिन नाम भी नही जपना चाहिए....... वाह रे पाखंडी .
गरीब,हुक्का हरदम पिवते,लाल मिलावै धूर। इसमें संशय है नहीं,जन्म पिछले सूर (pig)।।
गरीब,सौ नारी जारी करै,सुरा पान सौ बार।एक चिलम हुक्का भरै,डुबे काली धार।।
सावन सिंह महाराज के शिष्य खेमामल शाह मसताना डेरा सच्चासौदा के संस्थापक ने अपनी किताब में लिखा है कि सावनसिंह महाराज ने 12 साल तक मेरे शरीर में बैठ कर काम किया लेकिन किसी ने नहीं समझा अब मैं सतनाम सिंह के शरीर मे बैठकर नाम दूंगा।इससे सिद्ध होता हैकि अभी तो ये जीवन मरण के चक्कर में फसे हैं मुक्ति कहां से हुई।
श्रीमद्भगवत गीता अ०15श०4 में प्रमाण है सत्य साधना करने वाले साधक, परमेश्वर के उस परम धाम को प्राप्त हो जाते हैं,जहां जाने के पश्चात फिर लौटकर कभी संसार में नहीं आते।
समीक्षा > ये पंक्ति लिखते इन्होने ये भी नही सोचा कि ये पंक्तियां उनके ही विरुद हैं ..... पंक्ति मे कहा है कि सत्य साधना करने वाले साधक परमधाम को चले जाते हैं दूबारा संसार मे नही आता ... इसका मतलब ये हुआ कि फिर तो कबीर जी की साधना सची नही थी जो फिर रामपाल के रूप मे आये ...... देख ली इनकी गपौड़
यदि राधास्वामी के पास परमात्मा होते तो गद्दी न मिलने के कारण इतनी शाखाएं नहीं बनती।इस समय राधास्वामी की नौ से ज्यादा शाखाएं चल रही है।और पानी उसी एक कुएं का है।राधास्वामी वाले वाणियां तो कबीर साहेब की लेते है लेकिन उन्हे कवि और संत कह कर किनारा कर लेते है।
समीक्षा > यदि राधास्वामी के पास भगवान नही तो क्या परमान है कि कबीर पंथियों के पास भगवान है रामपाल कबीर पंथी का का कहना है सब ग्यान बंद करें बस हम ही झूठ भरा मन्गडंत अग्यान फैलाऐं ..... मूर्खो भगवान किसी के पास नही होता बल्कि सब भगवान की शरण हैं ..... रामपाल के पास कौनसा भगवान है लोग जान चुके हैं..... बाकी रही कबीर के संत और भगत की बात .... तो कबीर जी राम भगत थे राम की भगति करके ही संत बने.....
ये कबीर पंथी तो ये भी नही जानते कि कबीर जी भी नानक के उपदेश के बाद निरंकार परमेश्वर की ही प्रशंसा करते थे...... कबीर ग्रन्थावली की कुछ पंक्तियां हैं जिससे पता चलता है कि कबीर जी भी निराकार राम को ही मानते थे.....
गोब्यंदे तूँ निरंजन तूँ निरंजन राया।
तेरे रूप नहीं रेख नाँहीं, मुद्रा नहीं माया॥टेक॥
समद नाँहीं सिषर नाँहीं, धरती नाँहीं गगनाँ।
रबि ससि दोउ एकै नाँहीं, बहता नाँहीं पवनाँ॥
नाद नाँही ब्यँद नाँहीं काल नहीं काया।
जब तै जल ब्यंब न होते, तब तूँहीं राम राया॥
जप नाहीं तप नाहीं जोग ध्यान नहीं पूजा।
सिव नाँहीं सकती नाँहीं देव नहीं दूजा॥
रुग न जुग न स्याँम अथरबन, बेदन नहीं ब्याकरनाँ।
तेरी गति तूँहि जाँनै, कबीरा तो मरनाँ॥219॥
इन पंक्तियों से साफ पता चलता है कि कबीर जी निरंकार की भक्ति करने लगे थे जब नानक जी ने सतनाम उपदेश दिया |
मैं कहता हुँ यदि राधास्वामी वालो के पास इतना ज्ञान है तो अपनी किताबों में से कबीर साहेब जी ,दादू साहेब, पलटू साहेब,मलूक दास आदि की वाणियां अलग कर लो, क्योंकि इन सबके गुरु कबीर साहेब थे।तो फिर तुम्हारे पास क्या ज्ञान बचेगा? क्या राधास्वामी से पहले इस पृथ्वी पर परमात्मा नही थे?
सच तो यह है परमात्मा चारों युगों मे आते हैं और जीव को काल के बन्धन से छुड़ा कर सतलोक ले जाते हैं।
समीक्षा > इस हिसाब से नानक की वानी को भी रामपाल को अलग करनी चाहिए..... भगवदगीता के श्लोक भी निकाल देने चाहिए.... संसमवेद भी नानक जी ने उचारा है जिसकी नकलकर कबीर पंथी ने संसमवेद लिखा है........ सृष्टि रचना भी नानक जी की ही है....... जिसपर कबीर पंथी अपनी अपनी मोहर लगा रहे हैं ....... नानक जी की भविष्यवाणी अवतार लेने की भविष्य पुराण मे भी है.... पर राम भगत कबीर जी की नही है |
"सतयुग सतसुकृत कह टेरा,त्रेता नाम मुनिद्र मेरा।
द्वापर मे करुणामय कहाया,कलियुग नाम कबीर धराया।।
समीक्षा > इन पंक्तियों से साफ हो जाता है कि कबीर जी की मुक्ति नही तभी वो बार बार मातलोक मे आये
कबीर पंथी माने या नी माने ॐ के बिन मुक्ति नही
नानक जी ने सोहं नाम जपिया जिसमे ॐ कि ध्वनी है..... मुक्त हो गऐ दूबारा नही आऐ
रविदास भी नही आये, ब्रहमा, विशनु, महेश भी नही आये क्योंकि सब ने ॐ ध्वनि का जाप किया ..... कबीर भगत ने नही किया तभी बार बार मातलोक पर आना पड़ रहा है |
________
नीचे देखो खुद भी संत कह रहे हैं कबीर जी संत ही थे भगवान नही........
चारों युग संत पुकारे,कूक कहा हम हेल रे।
हीरे माणिक मोती बरसे,यह जग चुगता ढेल रे।।"
राधास्वामी वालो, जो किसी के कर्म नहीं काट सकता वह सतगुरु और परमात्मा कैसा? जबकि वेदों मे लिखा है, परमात्मा पापी के पाप नाश करके आयु भी बढ़ा देता है।राधास्वामी वाले तो ज्ञान को सुनना भी नहीं चाहते जब तक सुनोगे नहीं तो तुलना कैसे करोगे कि कौन सही है कौन गलत। यदि कोई व्यक्ति कह रहा है तो उसकी बातों पर ध्यान दो और उसका विशलेषण करो।समझदारी उसी को कहते हैं अन्यथा भेड़चाल तो सभी करते हैं।विस्तृत जानकारी के लिए "ज्ञान गंगा"पुस्तक पढ़े।
समीक्षा ग्यान गंगा जितनी झूठी कोई बुक नही वैसे तो कबीर पंथ की कबीर ग्रन्थावली और बीजक के अलावा सभी मे झूठ की मिलावट है.....
झुठे गुरुवा मर गए हो गए भूत मसान ।।
सतगुरु केवल कबीर साहिब ही हुए है या वह संत हुऐ हैं जिनको उन्होने दर्शन दिए इसका सबूत वह सभी संत आपनी अमृत वाणियों मे दे रहे हैं।
अनन्त कोटि ब्रह्माण्ड का एक रति नहीं भार ।
समीक्षा > पहली लाईन मे कह रहा है कि कबीर सतपुरूष है यानि सचा आदमी |आगे कहता है बाकी जितने भी गुरु हुऐ हैं सब झूठे थे और मर कर भूत के समान हो गऐ हैं ये सायद ये नही जानते कि कबीर जी की भी मृत्यु हुई मगहर के पास बहने वाली नदी मे जिसके बारे में कबीर ग्रन्थावली मे लिखा हुआ है राग गौड़ी मे
कबीरा संत नदी गया बहि रे,
ठाढ़ी माइ कराड़े टेरै, है कोई ल्यावैगहि रे॥टेक॥
बादल बाँनी राम घन उनयाँ, बरिषै अमृत धारा॥
सखी नीर गंग भरि आई, पीवै प्राँन हमारा ||
उपरोक्त लाईने दूर नदी पर खड़े एक माली ने कही जिसने वहां नदी के किनारे पलेज लगा रखी थी जिससे साबित होता है कि संत कबीर जी नदी मे बह गए | एक तरफ ये कबीर जी को सतपुरूष सतगुरु कह रहे हैं और दूसरी तरफ भगवान कहते हैं
सतगुरु पुरुष कबीर है कुल के सृजनहार ।।"whole world creater"
गरीब जम जोरा जासे डरे धर्मराय धरे धीर।
समीक्षा > ये देखो कोरा झूठ कह रहे हैं कि सतगुरु कबीर सतपुरूष यानि कि सचा आदमी है और दूसरी तरफ कह रहे हैं कि वो सृष्टि को बनाने वाले हैं क्या सृष्टि एक पुरुष ने बनाई | फिर तो कबीर वो प्रमात्मा था जिसने मन, जीव, सूरज, धरती बनाई | यहां ये भी बताना जरूरी है कि कबीर जी राम भगत थे क्योंकि रमानंद जी राजा राम के भगत थे | परन्तु कबीर जी उस राम नाम मे उसअविनाशी राम की भगति करते थे जो अलख सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक प्रभु है
अब स्वाल ये उठता है अगर कबीर भगत ने सृष्टि बनाई तो वो राम कौन था जिसकी भगति कबीर ने राम नाम से की | और प्रमात्मा को निरंकार कहा जिसका परमाण कबीर ग्रन्थावली मे है
"गोब्यंदे तूँ निरंजन तूँ निरंजन राया।
तेरे रूप नहीं रेख नाँहीं, मुद्रा नहीं माया॥टेक॥
समद नाँहीं सिषर नाँहीं, धरती नाँहीं गगनाँ।
रबि ससि दोउ एकै नाँहीं, बहता नाँहीं पवनाँ॥
नाद नाँही ब्यँद नाँहीं काल नहीं काया।
जब तै जल ब्यंब न होते, तब तूँहीं राम राया॥
जप नाहीं तप नाहीं जोग ध्यान नहीं पूजा।
सिव नाँहीं सकती नाँहीं देव नहीं दूजा॥
रुग न जुग न स्याँम अथरबन, बेदन नहीं ब्याकरनाँ।
तेरी गति तूँहि जाँनै, कबीरा तो मरनाँ॥219॥
ऐसा सतगुरु एक है अदली अदल कबीर।।-संत गरीब दास जी ।
जिन मोको निज नाम दिया सोई सतगुरु हमार।दादू दुसरा कोई नहीं कबीर सृजनहार ।।
-संत दादू साहेब जी।
समीक्षा > उपर पडो... एक तरफ ये सभी दादू और गरीबदास कबीर को सतगुरु कह रहे हैं | और फिर एकदम ही शृजनहार कह देते हैं | इसलिए ही लोग इन्हे गपौड़ी कहते हैं
धनि कबीर धनि वो संत गुरु जिन परम तत लखाया ।
कहै रैदास सुणौ हौ स्वामी पणै तुमारी आया ।।
-संत रविदास।
समीक्षा > यहां देखो महां गपोड़ कि संत रविदास जी कबीर जी को संत गुरु कहता दिखा रहे हैं जबकि रविदास जी और कबीर जी दोनो ही संत थे और रामानंद के शिष्य थे बताओ कबीर जी रविदास के गुरु कैसे हुऐ , है ना, गपैड़
चार दाग से सतगुरु न्यारा अजरो अमर शरीर ।
दास मलूक सलूक कहत है खोजो खसम कबीर ।।
-संत मलूक दास जी।
समीक्षा > उपरोक्त पंक्ति देखिए मलूक दास कह रहे हैं कबीर का शरीर भीअमर था अगर ऐसा था तो कबीर को उसी शरीर मे मजूद होना चाहिए था कहां गया | ये लोग नही जानते कि कबीर जी नदी मे डूब गये थे,,,, जिसका हमने उपर परमान दे दिया है | है ना गपौड
राधास्वामी पंथ काल का चलाया हुआ पंथ है।यदि कबीर साहेब का सूक्ष्म वेद(स्वसम वेद) पढ़ोगे तो उसमें सृष्टि रचना ,पूर्ण परमात्मा तथा अन्य भविष्यवाणियां कर रखी है जिन्हें सिर्फ उनका कृपा पात्र ही समझ सकता है
समीक्षा > देखो ये क्या कह रहा है इसके कहने का मतलब है बाकी जितने भी पंथ है वो काल के चलाऐ हुऐ हैं पर क्या ये बता सकते हैं कबीर पंथ किसका चलाया हुआ है क्या कबीर पंथ मे लोग मरते नही | ये ही है कबीर पंथ जिसमे दुनिया भर का झूठ है लगता है ये तो ये भी नही जानते कि संसमवेद कबीर का नही नानक जी का लिखा हुआ है कबीर भगत का नही
नीचे देखें जो मनगडन्त किताब से है जो 1995 या 2006 मे कबीर समर्थक दूारा लिखी किताबों मे से हैं जिनमे अंधा झूठ लिखा है
।।धर्मराय(काल ब्रह्म)वचन।।
हे साहेब तुम पंथ चलाओ,जीव उबार लोक ले जाओ।
पंथ एक तुम आप चलाओ, जीवन लै सतलोक पठाओ।।
कहा तुम्हारा जीव नहीं माने,हमारी ओर होय बाद बखाने ।।
काल कहता है कि मेरा पक्ष लेकर तुम्हारे साथ बाद विवाद किया करेंगे।
समीक्षा > उपरोक्त पंक्ति मे काल कह रहा है कि कबीर जी तुम एक पंथ चलाओ और जीवन लेकर सतलोक पहूच जाओ | क्योंकि जीव तुमहरा कहा मानेगगे और आगे काल कबीर को यह भी कह रहा है कि मेरा नाम लेकर लोग तुम से विवाद करेंगे..... हमारे ख्याल से लोग इनसे विवाद नही करते ये खुद ही कबीर पंथी विवाद की जड़ हैं क्योंकि ये हमेशा दूसरे पंथो और धर्मो के पीर पैगम्बर को गलत लिखते हैं और सब को कबीर के अधीन दिखाते हैं
कबीर हेब जी ने आगे कहा है।
सम्वत् सत्रा सौ पचहतर होई,ता दिन प्रेम प्रकटे जग सोई।।
यानि मेरी वाणी सम्वत् १५७५ में पुन: प्रकट होगी।
संत गरीब दास को १०वर्ष की उम्र में ही परमात्मा कबीर साहेब जी ने साधु रुप मे दर्शन देकर अपने साथ लेकर सतलोक ले गए। सतलोक तक सभी लोको की व्यवस्था (स्थिती)दिखा कर पुन: वापिस छोड़ा । परिवार वालों ने मरा हुआ समझ कर दाह संस्कार की तैयारी कर ली ।लेकिन चिता को अग्नि देने से पहले ही उठ खड़े हो गए।
जैसे उठे उन्होने कबीर वाणी बोलना शुरु कर दिया।
"अलल पंख अनुराग है,सुन्न मण्डल रहै थीर।
दास गरीब उदारिया,सतगुरु मिले कबीर।।"
कबीर परमात्मा ने अपनी अमृत वाणियां गरीब दास जी के माध्यम से प्रकट करवा के उन्हें लिपीवद्ध किया गया।जोकि इस समय संत रामपाल जी महाराज के पास ग्र्ंथ रुप में आश्रम में मौजूद है।
समीक्षा > ये उपरोक्त रामपाल की मनगडन्त किताब मे दूसरे ग्रन्थों से पंक्तियां लिखकर और अपने हिसाब से भावर्थ करके लोगों को गुम राह किया है ज्यादातर पंक्तियां गुरूग्रन्थ साहिब जी से चुराई और अपनी किताबें लिखी.... और उन पंक्तियों का मन चाहा अर्थ निकालकर लिखा......हम आपको बताना चाहे गे कि गुरूग्रन्थ साहिब मे जितनी भी वानी है सारी ही निरंकार परमेश्वर के प्रति है किसी भगत या गुरु के प्रति नही है.....
परम् पूज्य संत रामपाल जी महाराज संत गरीब दास जी की सतगुरु प्रणाली से आते हैं।
मार्च १९९७ में फाल्गुन शुक्ल एकम संवत् २०५४को दिन के दस बजे परमेशवर कबीर साहेब जी वास्तविक रुप में संत रामपाल जी महाराज को मिले तथा कहा कि चिंता मत कर, मैं तेरे साथ हुँ।अब सारनाम तथा सार शब्द प्रदान करने का समय आ गया है।
इसलिए अन्य नकली काल के पंथों से मोक्ष नहीं हो सकता।
समीक्षा > देखो महां गपोड़ और झूठ की रामपाल को कबीर जी मिले और रामपाल को बोला चिंता मत कर जितना मर्जी झूठ बोल और लिख मैं तेरे साथ हूं जिसका परिणाम ये हुआ रामपाल ने अपनी किताबों मे अंधा झूठ लिखकर अपने भगतां मे बांटी और उनका इतना माउंड वाछ किया कि अब उनको सच झूठ और झूठ सच लगता है | और कहता है कि दूसरे किसी भी पंथ के गुरु से नाम लेने से मोक्ष नही होगा मेरे से नामलें क्यो कि बाकी सब काल के पंथ हैं
राधास्वामी के मुखिया (परवर्तक)शिवदयालसिंह की मुक्ति नहीं हुई तो अन्य शिष्यों का क्या हाल होगा मृत्यु उपरान्त वे अपनी शिष्य बुक्की मे प्रेत की तरह प्रवेश कर गए थे।उसके बाद बुक्की हुक्का पीने लगी चुरमा लेने तथा पलंग बिछाने लगी उसकी आंखे सुर्ख अंगारा सी हो जाती थी।यदि कोई बात पूछनी होती तो बुक्की के जरिए शिवदयालसिंह से पूछ लिया करते थे ।अधिक जानकारी के लिए पढ़े।जीवन चरित्र स्वामीजी महाराज-लेखक प्रताप सिंह।
स्वामीजी महाराज अंतिम समय तक बुक्की के शरीर में प्रकट रहे।
बुक्की स्वामीजी के पैर का अंगुठा मुंह में रख कर चूसा करती थी।जब कोई मत्था टेकने के वास्ते हटाना चाहता तो वे चरण नहीं छोड़ना चाहती थी।तब मत्था टेकने वाले से कह दिया जाता इस प्यासी को मत हटाओ तुम दुसरे चरण पर मथा टेक लो।और बयान किया करती थी कि मुझे इसमें ऐसा रस आता है कि जैसे कोई दूध पीता है।
श्री शिवदयालसिंह का कोई गुरु नहीं था।उन्होने 17वर्ष तक कोठरीे में बंद रह कर हठयोग किया।वह हुक्का भी पीते थे।
समीक्षा > उपर देखो गपौड कबीर पंथी की राधास्वामी शिवदयाल सिंह की मुक्ति नही हुई ये गपौड़ी ऐसे कह रहे जैसे ये शिवदयाल जी को मिलकर आऐ हो और प्रमात्मा से डिरेक्ट मेल जोल हो.... ये उनके खाने पीने की बात करते हैं.... आदमी क्या पीता खाता है ये अहमियत नही रखता..... अहमिंयत रखती है सचाई इमानदारी.... और किसी की निंदा न करना...... ये कबीर पंथी कितने निंदक हैं आप इनके इस लेखन मे ही देख लो
अगर हम इनके हिसाब से बात मुक्ति की करें तो ... लगता है कबीर की खुद मुक्ति नही हुई क्योंकि कबीर पंथीयों के हिसाब से मुक्त वो होता है जो दूबारा संसार में न आऐ.... पर कबीर जी तो सतयुग, दूापर, त्रेता में भी आऐ और कलयुग मे तो दो बार एकबार तब जब कोई जन्म देकर तलाब के किनारे रख गई और दूसरी बार रामपालीयों के अनुसार रामपाल के रूप मे...... इसका मतलब हुआ कबीर राम भगत का राम नाम से मोक्ष नही हुआ | अब नानक जी ने जो कबीर को काशी मे सतनाम दिया अब वो ही सतनाम का जाप कर, बुरे कर्मो की सजा भुगत कर मोक्ष को प्राप्त होगा
अगर सचाई से जाप न किया फिर आऐगा
जो नानक ने कब्बीर को सतनाम उपदेश दिया उसका मतलब था १ॐ का जाप नानक जी के अनुसार जो ੴ सतनाम या ॐ सतनाम का जाप या वाहगुरू या अल्लाह का जाप नही करता मुक्त नही ......अगर कबीर जी ने शुरू से ही ॐ का जाप किया होता तो पुन: रामपाल के रूप मे जाटनी की कोख से पैदा न होता......... परन्तु कबीर रामपाल के रूप मे आया है ये कबीर पंथी ही कहते हैं जैसे कबीर इन्हे बता कर आया हो.
(ये कबीर पंथी लगता है दिमाग से सरके हुऐ हैं एक तरफ कहते हैं नाम जपने से मोक्ष हो जाता है जैसे कबीर का हो गया और दूसरी तरफ कबीर को पैदा ही करते जा रहे हैं कुछ सोचते ही नही)
जिसके बारे में कबीर साहेब जी कहते हैं।
"गुरु बिन माला फेरते ,गुरु बिन देते दान।
ये दोनों निष्फल है,चाहे पुछो वेद पुरान।।"
समीक्षा > एक तरफ ये रामपल के कबीर पंथी कहते हैं कि किसी को दान नही देना चाहिए | दूसरी तरफ कहते हैं गुरु से पूछ कर ही दान देना चाहिए ..... इसका मतलब हुआ गुरु कहेगा कि दान हमे दो तो उसे ही देना होगा | और कहते हैं गुरु के कहे बिन नाम भी नही जपना चाहिए....... वाह रे पाखंडी .
गरीब,हुक्का हरदम पिवते,लाल मिलावै धूर। इसमें संशय है नहीं,जन्म पिछले सूर (pig)।।
गरीब,सौ नारी जारी करै,सुरा पान सौ बार।एक चिलम हुक्का भरै,डुबे काली धार।।
सावन सिंह महाराज के शिष्य खेमामल शाह मसताना डेरा सच्चासौदा के संस्थापक ने अपनी किताब में लिखा है कि सावनसिंह महाराज ने 12 साल तक मेरे शरीर में बैठ कर काम किया लेकिन किसी ने नहीं समझा अब मैं सतनाम सिंह के शरीर मे बैठकर नाम दूंगा।इससे सिद्ध होता हैकि अभी तो ये जीवन मरण के चक्कर में फसे हैं मुक्ति कहां से हुई।
श्रीमद्भगवत गीता अ०15श०4 में प्रमाण है सत्य साधना करने वाले साधक, परमेश्वर के उस परम धाम को प्राप्त हो जाते हैं,जहां जाने के पश्चात फिर लौटकर कभी संसार में नहीं आते।
समीक्षा > ये पंक्ति लिखते इन्होने ये भी नही सोचा कि ये पंक्तियां उनके ही विरुद हैं ..... पंक्ति मे कहा है कि सत्य साधना करने वाले साधक परमधाम को चले जाते हैं दूबारा संसार मे नही आता ... इसका मतलब ये हुआ कि फिर तो कबीर जी की साधना सची नही थी जो फिर रामपाल के रूप मे आये ...... देख ली इनकी गपौड़
यदि राधास्वामी के पास परमात्मा होते तो गद्दी न मिलने के कारण इतनी शाखाएं नहीं बनती।इस समय राधास्वामी की नौ से ज्यादा शाखाएं चल रही है।और पानी उसी एक कुएं का है।राधास्वामी वाले वाणियां तो कबीर साहेब की लेते है लेकिन उन्हे कवि और संत कह कर किनारा कर लेते है।
समीक्षा > यदि राधास्वामी के पास भगवान नही तो क्या परमान है कि कबीर पंथियों के पास भगवान है रामपाल कबीर पंथी का का कहना है सब ग्यान बंद करें बस हम ही झूठ भरा मन्गडंत अग्यान फैलाऐं ..... मूर्खो भगवान किसी के पास नही होता बल्कि सब भगवान की शरण हैं ..... रामपाल के पास कौनसा भगवान है लोग जान चुके हैं..... बाकी रही कबीर के संत और भगत की बात .... तो कबीर जी राम भगत थे राम की भगति करके ही संत बने.....
ये कबीर पंथी तो ये भी नही जानते कि कबीर जी भी नानक के उपदेश के बाद निरंकार परमेश्वर की ही प्रशंसा करते थे...... कबीर ग्रन्थावली की कुछ पंक्तियां हैं जिससे पता चलता है कि कबीर जी भी निराकार राम को ही मानते थे.....
गोब्यंदे तूँ निरंजन तूँ निरंजन राया।
तेरे रूप नहीं रेख नाँहीं, मुद्रा नहीं माया॥टेक॥
समद नाँहीं सिषर नाँहीं, धरती नाँहीं गगनाँ।
रबि ससि दोउ एकै नाँहीं, बहता नाँहीं पवनाँ॥
नाद नाँही ब्यँद नाँहीं काल नहीं काया।
जब तै जल ब्यंब न होते, तब तूँहीं राम राया॥
जप नाहीं तप नाहीं जोग ध्यान नहीं पूजा।
सिव नाँहीं सकती नाँहीं देव नहीं दूजा॥
रुग न जुग न स्याँम अथरबन, बेदन नहीं ब्याकरनाँ।
तेरी गति तूँहि जाँनै, कबीरा तो मरनाँ॥219॥
इन पंक्तियों से साफ पता चलता है कि कबीर जी निरंकार की भक्ति करने लगे थे जब नानक जी ने सतनाम उपदेश दिया |
मैं कहता हुँ यदि राधास्वामी वालो के पास इतना ज्ञान है तो अपनी किताबों में से कबीर साहेब जी ,दादू साहेब, पलटू साहेब,मलूक दास आदि की वाणियां अलग कर लो, क्योंकि इन सबके गुरु कबीर साहेब थे।तो फिर तुम्हारे पास क्या ज्ञान बचेगा? क्या राधास्वामी से पहले इस पृथ्वी पर परमात्मा नही थे?
सच तो यह है परमात्मा चारों युगों मे आते हैं और जीव को काल के बन्धन से छुड़ा कर सतलोक ले जाते हैं।
समीक्षा > इस हिसाब से नानक की वानी को भी रामपाल को अलग करनी चाहिए..... भगवदगीता के श्लोक भी निकाल देने चाहिए.... संसमवेद भी नानक जी ने उचारा है जिसकी नकलकर कबीर पंथी ने संसमवेद लिखा है........ सृष्टि रचना भी नानक जी की ही है....... जिसपर कबीर पंथी अपनी अपनी मोहर लगा रहे हैं ....... नानक जी की भविष्यवाणी अवतार लेने की भविष्य पुराण मे भी है.... पर राम भगत कबीर जी की नही है |
"सतयुग सतसुकृत कह टेरा,त्रेता नाम मुनिद्र मेरा।
द्वापर मे करुणामय कहाया,कलियुग नाम कबीर धराया।।
समीक्षा > इन पंक्तियों से साफ हो जाता है कि कबीर जी की मुक्ति नही तभी वो बार बार मातलोक मे आये
कबीर पंथी माने या नी माने ॐ के बिन मुक्ति नही
नानक जी ने सोहं नाम जपिया जिसमे ॐ कि ध्वनी है..... मुक्त हो गऐ दूबारा नही आऐ
रविदास भी नही आये, ब्रहमा, विशनु, महेश भी नही आये क्योंकि सब ने ॐ ध्वनि का जाप किया ..... कबीर भगत ने नही किया तभी बार बार मातलोक पर आना पड़ रहा है |
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नीचे देखो खुद भी संत कह रहे हैं कबीर जी संत ही थे भगवान नही........
चारों युग संत पुकारे,कूक कहा हम हेल रे।
हीरे माणिक मोती बरसे,यह जग चुगता ढेल रे।।"
राधास्वामी वालो, जो किसी के कर्म नहीं काट सकता वह सतगुरु और परमात्मा कैसा? जबकि वेदों मे लिखा है, परमात्मा पापी के पाप नाश करके आयु भी बढ़ा देता है।राधास्वामी वाले तो ज्ञान को सुनना भी नहीं चाहते जब तक सुनोगे नहीं तो तुलना कैसे करोगे कि कौन सही है कौन गलत। यदि कोई व्यक्ति कह रहा है तो उसकी बातों पर ध्यान दो और उसका विशलेषण करो।समझदारी उसी को कहते हैं अन्यथा भेड़चाल तो सभी करते हैं।विस्तृत जानकारी के लिए "ज्ञान गंगा"पुस्तक पढ़े।
समीक्षा ग्यान गंगा जितनी झूठी कोई बुक नही वैसे तो कबीर पंथ की कबीर ग्रन्थावली और बीजक के अलावा सभी मे झूठ की मिलावट है.....
बेवकूफ आदमी तुमने उस वाणी का मतलब नही समझा जो मगहर मे नदी चला दी थी कबीर जी ने
जवाब देंहटाएंकबीर जी ने स्वयं ही भक्त संत और भगवान की लीला की है
जवाब देंहटाएंRADHA SOAMI WALON KI KITAB MEIN BHI LIKHA KI RANI INDUMATI JAB SATLOK YASACHKHAND PAHUNCHI TO KABIR SAHEB KO KUL MALIK KI PADVI PAR DEKH KAR BOLI PRABHU AAP MRITYU LOK MEIN MUZH KO BATA DETE KI AAP MALIK HO TO KABIR SAHEB NE KAHA RANI TUM KO VISHWASS NAHIN HONA THAAA TO KYA AB RADHA SOAMI BHI ZHOOTE HAIN?TUM KOI BHI HO SANT SATGURU RAMPAL JI KO CONDEMN KARNE WALE GIANI TUM BHI NAHIN HO
जवाब देंहटाएंTo tum hi bata do Bhai kon he god
जवाब देंहटाएंकबीर इज गॉड कबीर ही पूर्ण परमात्मा है
हटाएंCharo yug me me bandichod sarir dharan karake satya asatya ko samajhte hai
जवाब देंहटाएंRight bro
जवाब देंहटाएंJhuth
जवाब देंहटाएंइसमें लिखी गई सब बकवास है यह ज्ञान हीन के मूर्खता का प्रमाण
जवाब देंहटाएंरामपाल जी के पहले कहां था आपका ज्ञान?
जवाब देंहटाएंKabir saheb me apne hate ke isaare se sookhi nadi jal se bhar di thi Jiska parmaan wo kisaan tha aap galat bataa rahe hai
जवाब देंहटाएंWrong post
जवाब देंहटाएंTere jaisa 😂 befkoof pehli baar dekha 👏👏👏 laga rhe.... Bhaang pee ke Kuch bol bolta hain
जवाब देंहटाएंTere jaisa Befkoof Pehli baar dekha...😂👏👏👏 Bhaang pee ke kuch bhi bolta hai...🤣
जवाब देंहटाएंकौन है यह बकलोल लिखने वाला 😂😂 तौबा तौबा सारा मूड खराब kr दिया
जवाब देंहटाएंकौन गपोड़ी है, ये लिखने वाला 🤣🤣 लगता है, सत्यानाश प्रकाश पढ़ ली 🤣🤣🙏🙏
जवाब देंहटाएंराधास्वामी पंथ निराधार ज्ञान पर आधारित है जिसके प्रमाण स्वरूप उनके अनुयायियों को भक्ति का विशेष लाभ नहीं मिलता। वर्तमान में एकमात्र संत रामपाल जी महाराज सभी सद्ग्रन्थों से तत्वज्ञान को समझाकर भक्त समाज पर
जवाब देंहटाएंबड़ा उपकार का कार्य कर रहे हैं। जिन्हें कल्याण चाहिए वे संत रामपाल जी महाराज के सत्संग सुनकर सद्ग्रन्थों में बताए अनुसार धार्मिक ज्ञान को अवश्य समझिये ।