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रामपाल के झूठे ग्यान पर एक नजर

सतगुरू पुरुष कबीर हैं चारों युग परवान। झुठे गुरुवा मर ग ए हो गए भूत मसान ।। सतगुरु केवल कबीर साहिब ही हुए है या वह संत हुऐ हैं जिनको उन्होने दर्शन दिए इसका सबूत वह सभी संत आपनी अमृत वाणियों मे दे रहे हैं। अनन्त कोटि ब्रह्माण्ड का एक रति नहीं भार । समीक्षा > पहली लाईन मे कह रहा है कि कबीर सतपुरूष है यानि सचा आदमी |आगे कहता है बाकी जितने भी गुरु हुऐ हैं सब झूठे थे और  मर कर भूत के समान हो गऐ हैं ये सायद ये नही जानते कि कबीर जी की भी मृत्यु हुई मगहर के पास बहने वाली नदी मे जिसके बारे में कबीर ग्रन्थावली मे लिखा हुआ है राग गौड़ी मे  कबीरा संत नदी गया बहि रे, ठाढ़ी माइ कराड़े टेरै, है कोई ल्यावैगहि रे॥टेक॥ बादल बाँनी राम घन उनयाँ, बरिषै अमृत धारा॥ सखी नीर गंग भरि आई, पीवै प्राँन हमारा ||  उपरोक्त लाईने दूर नदी पर खड़े एक माली ने कही जिसने वहां नदी के किनारे पलेज लगा रखी थी जिससे साबित होता है कि संत कबीर जी नदी मे बह  गए | एक तरफ ये कबीर जी को सतपुरूष सतगुरु कह रहे हैं और दूसरी तरफ भगवान कहते हैं  स तगुरु पुरुष कबीर है कुल के सृजनहार ।।"whole world creater...